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Chaitra Navratri 2021: प्रकृति की आराधना का पर्व नवरात्रि

सर्वेश तिवारी श्रीमुख

Chaitra Navratri 2021: चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ हो चुका है। शक्ति की आराधना का पर्व है नवरात्रि और सृष्टि की शक्ति कोई और नहीं, स्वयं प्रकृति ही है। तो इस प्रकार प्रकृति की आराधना का पर्व है नवरात्रि। आज द्वितीया है, माता ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन। हिमालय के यहां जन्मी माता ने जब भगवान शिव को पतिरूप में पाने के लिए लम्बी और कठिन तपस्या की, तो उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। माता का यह स्वरूप कृपा स्वरूप है। माता ब्रह्मचारिणी का मानवीय स्वरूप पर्वतराज की पुत्री के रूप में था, पर उनका स्थूल स्वरूप प्रकृति ही है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ क्या है? वह स्त्री जो सांसारिक वासना और किसी के प्रति आसक्ति के भाव से पूर्णत: मुक्त हो। प्रकृति को देखिए, है उसे किसी विशेष के प्रति आसक्ति? कोई मोह, किसी एक के प्रति कोई विशेष ममता? नहीं। उसका व्यवहार सभी के लिए समान है। यदि मनुष्य उसका सम्मान करे, तो वह मातृवत व्यवहार करती है और यदि सम्मान न करे, तो विनाश भी वही करती है। ब्रह्मचारिणी संसार के लिए माता हैं, वही दुष्टों के लिए काल हैं।

चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन अर्थात रामनवमी को ही भगवान श्रीराम ने अवतार लिया था। इसलिए वर्तमान समय में यह नवरात्रि उन्हीं के जन्मोत्सव के रूप में अधिक प्रसिद्ध है, पर लोक में नवमी पर्व राम जन्म के बहुत पहले से मनाया जाता है। जब विश्व में भारत के अतिरिक्त अन्य कहीं सभ्यता बसी भी नहीं थी, जब मनुष्य ने पहली बार मौसम चक्र को समझा था, प्राकृतिक शक्तियों को समझा था और उसी आधार पर वर्ष की अवधारणा जन्मी थी। भारत भूमि पर मनुष्य ने पहली बार व्यवस्थित तरीके से कृषि प्रारम्भ की थी, तब जाड़े की फसल तैयार होने के बाद चैत्र शुक्ल पक्ष से नववर्ष का प्रारम्भ मान कर पहले नौ दिनों को प्रकृति पूजा का दिन तय किया गया और नए अन्न से पकवान बना कर ईश्वर को अर्पित करने की परम्परा बनी। यही नवरात्रि और नवमी का लौकिक स्वरूप है।
(लेखक पौराणिक पात्रों और कथानकों पर लेखन करते हैं)



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