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Chaitra Navratri 2021 : नवरात्र में छिपे हैं जीवन को सकारात्मक बनाने वाले सूत्र

Chaitra Navratri 2021 : इन नौ दिनों में हम व्रत या उपवास के माध्यम से अपने तन और मन का शुद्धिकरण करते हैं। आधुनिक सेहत विज्ञानी भी शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन यानी शुद्धिकरण के लिए फास्टिंग और मन के डिटॉक्सिफिकेशन के लिए अध्यात्म की उपयोगिता को स्वीकार कर चुके हैं। मां दुर्गा ने भी आसुरी शक्तियों का विनाश करके इस दुनियाँ का डिटॉक्सिफिकेशन किया और नकारात्मकता दूर करने का संदेश दिया था ।

सकारात्मक नजरिया -
हम सब जानते हैं कि महिषासुर व अन्य असुरों ने अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हुए मां दुर्गा को डराने की कोशिश की थी। जगदंबा कभी न डरीं न उनके मन में कोई नकारात्मक विचार आया। उन्हें अपनी शक्तियों पर भरोसा था। इसी सकारात्मक नजरिए की वजह से उन्होंने असुरों का विनाश किया था। इस अवसर पर नए अनाज ,गेहूं या जौ उगाने की प्रक्रिया भी सकारात्मकता का ही संदेश है। साथ ही अपने कष्टों व जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए देवी शक्ति का आह्वान और उन पर हमारी अटूट आस्था भी सकारात्मकता का ही भाव है।

कठिनाई से सीखें लडऩा-
देवी का हर रूप अपने आप में अद्भुत सुंदर और अनुकरणीय है और हर रूप से हमें कुछ सीखने मिलता है। मां दुर्गा की धार्मिक कथाओं में वर्णन है कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव की शक्ति के एकत्रीकरण के बाद देवी दुर्गा का अवतार इस दुनियाँ को बचाने के लिए लिया गया था। मां दुर्गा असुरों के छल और बल का निरंतर विश्लेषण और आकलन करती रहीं और उसी के अनुरूप उन्होंने अपनी रणनीति बनाई। इससे शत्रु पर विजय का उनका अभियान सफल हो गया। आप भी अपनी कठिनाइयों के प्रति यही रणनीति अपनाएंगी तो आपको जीवन में किसी कठिनाई से निपटने में मुश्किल नहीं होगी।

स्त्रीत्व पर गर्व-
असुरों ने देवी पर व्यंग्य कर कहा कि यह एक नारी होकर हमसे क्या मुकाबला करेगी। नतीजा सबको पता है। देवी से प्रेरणा लेते हुए प्रण करें कि अगर आपने एक स्त्री के रूप में जन्म लिया है, तो इस बात पर कभी अफसोस नहीं जताएंगी। निश्चय करें कि आप खुद को अबला बताकर कोसने की बजाय अपने भीतर निहित शक्ति को महसूस करेंगी। बेचारगी को त्यागकर अपने सुकून, अपनी खुशहाली का हर संभव प्रयास करेंगी।

महिला की भूमिका-
महिलाओं के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने की बड़ी चुनौती होती है। उन पर मां, बेटी, ननद, भाभी,पत्नी जैसी कई भूमिकाओं को निभाने का दबाव भी होता है।मां दुर्गा के 9 रूप हैं और सबकी भूमिका और स्वभाव भी अलग-अलग हैं। इससे हमें सीख मिलती है कि हमेशा परिस्थिति के अनुसार अपने आप को नई भूमिका के अनुरूप ढालने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोई स्थिति चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, खुद को शांत रखते हुए लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। डरना आपका स्वभाव नहीं होना चाहिए। आत्मविश्वास व साहस महिला के सच्चे हथियार है।

हार का विचार करें खत्म-
देवी पुराण के अनुसार देवी दुर्गा का अस्तित्व शक्ति को महसूस करने और हर तरह के डर पर काबू पाने के बारे में है। संदेश यह है कि अगर मनुष्य खुद पर विश्वास रखता है, हार मानने के विचार को खत्म करता है तो सफलता हासिल करने में उसे देर नहीं लगती।



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