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नवसंवत्सर ( NavSamvatsar ) 2078 : आनन्द क्यों नहीं, उसके बाद का राक्षस नाम क्यों? जानें क्या है राज

हिंदू धर्म के अनुयायी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवसंवत्सर यानि नववर्ष मनातोहैं। माना जाता है कि इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ था। तकरीबन 90 वर्ष बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब संवत 2078 'राक्षस' नाम से जाना जाएगा। जबकि संवत्सर के क्रमानुसार नाम की गणना में प्रमादी संवत्सर के बाद आनन्द और उसके बाद राक्षस संवत्सर आता है।

वहीं संवत्सर 2077 जो वर्तमान में चल रहा है वह प्रमादी नाम का है, ऐसे में लोगों के मन में ये प्रश्न उठ रहा है कि इसके बाद का संवत्सर जो 2078 के रूप में आ रहा है वह आनन्द के नाम से न होकर राक्षस क्यों कहला रहा है।

इस संबंध पंडित भगवती पंत का कहना है कि हिंदू ग्रंथों में 60 संवत्सरों का उल्लेख किया गया है। जो क्रमवार चलते हैं। ऐसे में प्रमादी (संवत 2077 प्रमादी के नाम से है) के बाद वाला संवत आनन्द नाम से जाना जाता है, लेकिन इसके बावजूद संवत 2078 'राक्षस' नाम से जाना जाएगा।

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क्रमवार नाम से ऐसे समझें हिंदू संवत्सरों को...
(1) प्रभव,(2) विभव,(3) शुक्ल,(4) प्रमोद,(5) प्रजापति,(6) अंगिरा,(7) श्रीमुख,(8) भाव,(9) युवा,(10) धाता,(11) ईश्वर,(12) बहुधान्य,(13) प्रमाथी,(14) विक्रम,(15) विषु,(16) चित्रभानु,(17) स्वभानु,(18) तारण,(19) पार्थिव,(20) व्यय,(21) सर्वजित्,(22) सर्वधारी,(23) विरोधी,(24) विकृति,(25) खर,(26) नंदन,(27) विजय,(28) जय,(29) मन्मथ,(30) दुर्मुख,(31) हेमलम्ब,(32) विलम्ब,(33) विकारी,(34) शर्वरी,(35) प्लव,(36) शुभकृत्,(37) शोभन,(38) क्रोधी,(39) विश्वावसु,(40) पराभव,(41) प्लवंग,(42) कीलक,(43) सौम्य,(44) साधारण,(45) विरोधकृत्,(46) परिधावी,(47) प्रमादी,(48) आनन्द,(49) राक्षस,
(50) नल,(51) पिंगल,(52) काल,(53) सिद्धार्थ,(54) रौद्रि,(55) दुर्मति,(56) दुंदुभि,(57) रुधिरोद्गारी,(58) रक्ताक्ष,(59) क्रोधन और (60) अक्षय।

बदलाव का ये है कारण
दरअसल निर्णय सिंधु के संवत्सर प्रकरण में यह उल्लेख किया गया है कि संवत्सर क्रमानुसार चलते हैं। ऐसे में 89 वर्ष का 'प्रमादी' संवत्सर अपना पूरा वर्ष व्यतीत नहीं कर रहा। इसे अपूर्ण संवत्सर के नाम से जाना जाएगा। जिसके कारण 90 वर्ष में पड़ने वाला संवत्सर विलुप्त नाम का संवत्सर 'आनन्द' का उच्चारण नहीं किया जाएगा।

इस निर्णय के अनुसार वर्तमान संवत 2077 'प्रमादी' नाम का संवत्सर फाल्गुन मास तक रहेगा। इसके बाद पड़ने वाला 'आनन्द' नाम का विलुप्त संवत्सर पूर्ण वत्सरी अमावस्या तक रहेगा। जबकि आगामी संवत्सर संवत 2078 जो राक्षस नाम का होगा वह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होगा। यह संवत्सर 31 गते चैत्र तद अनुसार 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से प्रारंभ होगा।

Navsamvatsar 2078 name is RAKSHAS

90 साल से अधिक समय बाद बन रही विचित्र स्थिति...
पंडित एचएस उप्रेती के अनुसार के अनुसार 13 अप्रैल मंगलवार को दिन दो बजकर 32 मिनट में सूर्य का मेष राशि में प्रवेश हो रहा है और इसी दिन से नवसंवत्सर शुरु होगा।

सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही विषुवत संक्रांति प्रारंभ हो जाएगी। वही विषुवत संक्रांति का पर्व 9 गते वैशाखा 14 अप्रैल बुधवार से मनाया जाएगा। संवत्सर प्रतिपदा और विषुवत संक्रांति दोनों एक ही दिन 31 गते चैत्र, 13 अप्रैल को हो रही है।

पंडित केबी शक्टा के अनुसार यह विचित्र परिस्थिति 90 सालों से अधिक समय के बाद हो रही है। मुहुर्त चिंतामणि के शुभाशुभ प्रकरण में श्लोक संख्या 53 में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि बृहस्पति मेष, वृष, कुंभ, मीन राशि को छोड़कर अन्य राशियों में तीव्र गति से सौरमंडल में विचरण करते है। जिस कारण संवत्सर प्रतिपदा व विषुवत संक्रांति एक साथ पड़ती है।

विषुवत संक्रांति के दिन पवित्र तीर्थस्थलों में स्नान आदि होगा।

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राक्षस संवत्सर में ग्रहों का प्रभाव...
शनिदेव मकर राशि में स्वग्रही होकर भोग करेंगे। धनु राशि उनकी लात तथा कुंभ राशि पर उनकी दृष्टि बनी रहेगी। इन राशियों के जातकों को शनि देव का जाप करना हितकर रहेगा। कर्क राशि पर शनि की दया बने रहेगी। वृष राशि के जातकों को राहु दिगभ्रमित करेगा।

इसलिए वृषभ राशि के जातक राहु का जाप करें। आगामी संवत्सर राक्षस में वृष, कन्या, मकर वर्ष अपैट के साथ ही संवत्सर प्रतिपदा भी अपैट रहेगी। कृतिका, रोहिणी तथा मृगशिरा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों पर वामपदा दोष बना रहेगा।

राक्षत्र संवत्सर का असर...
पंडित केबी शक्टा के अनुसार इस संवत्सर के दौरान रोग बढ़ेंगे, भय और राक्षस प्रवृत्ति के लोगों में पाई जाएगी। यदा-कदा दुर्भिक्ष, अकाल तथा संक्रामक रोगों से संपूर्ण देश प्रभावित रहेगा। गुरु के पास वित्त विभाग रहेगा, जिसके चलते धन की कमी नही होने दी जाएगी।

वहीं बुध देव कृषि मंत्री हैं जिससे अनाज की कमी नहीं आएगी। चंद्रमा पर देश रक्षा का भार रहेगा,लेकिन इस संवत्सर के राजा व मंत्री दोनों ही मंगल यानि भौमदेव होंगे। ऐसे में मंगल जहां शरीर में रक्त के कारक है, वहीं ये जमीन के भी कारक है। जिसके चलते जमीनी सीमा के मामले में देश को लाभ होगा।

Navsamvatsar 2078 special

दिखेगा मंगल का असर
दोनों पदों पर मंगल के ही होने के चलते माना जा रहा है कि यह स्थिति भारत के पराक्रम और वैभव में वृद्धि करेगी चुंकि इस वर्ष के राजा मंगल होंगे तो ये हमारी तीनों सेनाओं का मनोबल बहुत उंचा रखेंगे।

जहां तक हमारी आर्म फोर्स की बात है वे नए तरह के हथियार का इस्तेमाल कर सकती हैं। नए तरह की क्षेत्रों में अपना विस्तार करते हुए नए आपरेशन कर सकती है। कुटनीति व विदेश नीति इस साल नए आंदाज में होगी। जिसे आगे चल कर दुनिया भर में सराहा जाएगा।

वहीं इस साल जगह जगह आंदोलनों की बाढ़ सी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद सरकार अपने परक्रम के साथ कई कार्यों पर जीत हासिल करेंगी। संवत्सर आधा बीतने के बाद ये आंदोलन नगण्य से हो जाएंगे।

वहीं फरवरी मार्च 2022 में युद्ध की स्थिति ज्यादा बनती दिख रही है। लेकिन यदि इसके बाद भी बनी तो दुनिया को भारत का पराक्रम देखने को मिलेगा, जिसके चलते भारत एक नए रूप में दुनिया को दिखेगा। इसका कारण भी मंगल ही होगा।

अपनी गरीमा को प्राप्त होगा भारत
मंगल भूमि का कारक है और युद्ध भी भूमि को ही लेकर होगा, कुल मिलाकर इस बार भूमि का विस्तार भारत का होगा या यूं समझें कि भारत की भूमि विमुक्त हो जाएगी। भारत अपनी गरीमा को प्राप्त होगा, अफगानिस्तान भी इसमें भारत का साथ देगा।

ये भी मुमकिन है कि गिलगित,ग्लवान घाटी,गिलगिट,तिब्बत का क्षेत्र व मुजफ्फराबाद तक का क्षेत्र आदि भारत में ही मिल सकता है, या आजाद हो सकता है। पाकिस्तान के एक दो टुकडे हो सकते हैं। भारत का सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ेगा।

कोरोना का क्या होगा-
ये कुछ हद तक करीब 2021 के शुरुआती महीनों तक नियंत्रण की ओर रहेगी, लेकिन इसके बाद एक बार फिर इसके अनियंत्रित होने का डर फैलेगा... लेकिन अप्रैल अंत तक वैक्सीन आसानी से मिलने लगेगी। जिससे इसका खौफ व भय भी धीरे धीरे गायब होने लगेगा, लेकिन इस समय सावधान रहना होगा। भारत का इम्यून काफी मजबूती से उभरेगा।

वहीं संवत्सर के अंत तक भारत को दुनिया में कुछ अलग ढंग से पहचान मिल सकती है। भारत के कोरोना नियंत्रण में योेगदान को लेकर देश की काफी सराहना होगी, इसके अलावा भारत की वैक्सीन सर्वाधिक कारगर होने के चलते करीब 100 से अधिक देश भारत की वैक्सीन का उपयोग कर लाभ लेंगे। ज्योतिष के जानकारों अनुसार इस कारण के चलते भारत को अप्रैल 2022 के आसपास कोई बड़ा पुरस्कार भी मिल सकता है।

ऐसे समझें इस संवत्सर 2078 का असर...
इस साल संवत का स्थान धोबी का घर है जो वर्षा का योग बनाता है। उत्तर पूर्व का नए तरीके से विकास होगा। चोरी, लूट , ठगी आदि में वृद्धि हो सकती है। प्राकृतिक विपदाओं से जनधन की हानि हो सकती है। वहीं इस दौरान वेब मीडिया का प्रभाव बढ़ेगा। भारत कई नए उपग्रह आकाश में भेज सकता है। कई नई कंपनियों के आने से रोजगार में वृद्धि होगी।

रक्तपात की घटनाएं, हिंसा आदि भी इस साल होने की आशंका है। सम्प्रदायिक दंगों की भी संभावनाएं हैं। विरोधी दल के कुछ नेता जनता को गुमराह कर सकते हैं। जिससे सामाजिक ताने बाने में परेशानी हो सकती है। भूकंप, भूस्खलन आने की संभावना के साथा ही बाढ़ आदि का प्रकोप भी इस साल देखने को मिल सकता है।



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