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महिलाओं में एस्ट्रोजन के असंतुलन से ज्यादा दिक्कतें आहार में मेडिटेरियन डाइट लेना फायदेमंद

कोरोना काल में महिलाओं में कई तरह की दिक्कतें हुईं। इसमें हार्मोनल बदलाव से शारीरिक-मानसिक परेशानी अधिक देखने को मिली हैं। थकान, बेचैनी, मोटापा, पीसीओडी, एस्ट्रोजन की कमी से उनमें इम्युनिटी को लेकर भी समस्याएं आ रही हैं। एस्ट्रोजन के असंतुलन से महिलाओं में अधिक दिक्कत होती है।
एस्ट्रोजन महिला के विकास के लिए सबसे अहम हार्मोन है। यह महिला के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है। यह गर्भधारण से लेकर पाचन और मेटाबोलिज्म को भी प्रभावित करता है।
12 से बनते और 47 वर्ष में बंद होते ये हार्मोन
महिलाओं में दो प्रमुख हार्मोन होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन। ये 10-12 वर्ष की उम्र से बनने लगते हैं। इसी उम्र में गर्भ का विकास होता और इसमें ही बनते हैं। फिर माहवारी शुरू होती है। इन हार्मोन के संतुलन से महिलाओं में संतान उत्पत्ति की क्षमता होती है। हड्डियां मजबूत रहती हैं व हृदय रोगों का खतरा कम होता है। इसमें एस्ट्रोजन प्रमुख है। औसतन 47 वर्ष की उम्र तक ये हार्मोन बनते हैं। मेनोपॉज शुरू होने के बाद ये हार्मोन बनने बंद हो जाते हैं। इससे कई बीमारियों की आशंका बढ़ती है।
संभावित लक्षण
पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग, प्री मेनोपॉज, भूख न लगना, अनिद्रा की समस्या, मानसिक तनाव, अचानक वजन बढ़ जाना, हड्डियों में कमजोरी से कमर-जोड़ों में दर्द, याद्दाश्त व आत्मविश्वास में कमी व उदासी आदि लक्षण दिखते हैं।
एस्ट्रोजन की गड़बड़ी से होने वाले रोग
हैवी वर्कआउट से भी दिक्कत हो सकती एनोरेक्सिया (ईटिंग डिसऑर्डर), थायरॉइड, ओवरीज में दिक्कत, प्री-मेनोपॉज, प्री मैच्योर ऑवेरियन फेल्योर, हैवी वर्कआउट, कीमोथैरेपी, पिट्यूटरी ग्रंथि में खराबी, ओवरी की सर्जरी, फैमिली हिस्ट्री है तो महिला में एस्ट्रोजन की कमी हो सकती है।

हृदय रोगों का खतरा कम होगा
इस डाइट से ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों की कमजोरी, प्री व पोस्ट मेनोपॉज, मानसिक अवसाद, तनाव और चिड़चिड़ापन आदि परेशानियों से राहत मिलती है। इसमें कैलोरी कम होती है जिससे हृदय और हार्मोन से जुड़ी बीमारियां, डायबिटीज, कैंसर और क्रॉनिक डिजीज का खतरा कम होता है।
ऐसे समझें क्या है मेडिटेरियन डाइट
मेडिटेरियन डाइट, मेडिटेरेनियन देशों का आहार है जो उत्तरी अफ्रीका, यूरोप, अनातोलिया तथा मध्य पूर्व के बीच स्थित है। इसमें दो-चौथाई ताजे फल-सब्जियां, एक चौथाई अनाज और एक चौथाई प्रोटीन वाली चीजें होती हैं। इसमें उबली और कम ऑलिव ऑयल वाली चीजें खाते हैं। साथ ही इसमें 45 मिनट का व्यायाम जैसे टहलना, साइक्लिंग, स्वीमिंग आदि शामिल है। महिला को सोशल होना जरूरी है। साथ में मानसिक खेल जैसे सूडोको, चेस भी कम से कम आधा घंटा खेलना होता है।
एक कटोरी अंकुरित अनाज जरूर खाएं
नियमित हल्का व्यायाम और योगासन करें। संतुलित, कम वसायुक्त, रेशेदार भोजन खाएं। ओमेगा-3 युक्त आहार जैसे अलसी, अंडे, चिया सीड्स, सूखे मेवों और फिश को डाइट का हिस्सा बनाएं। महिलाएं रोज 60 ग्राम सोयाबीन के उत्पाद लें। एक कटोरी अंकुरित दालें खाएं। इसमें प्रोटीन अधिक होता है। 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। अनिद्रा से भी हार्मोन असंतुलन होता है। भरपूर पानी पिएं। अल्कोहल से दूर रहें।



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