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विश्व क्षय दिवस 2021 : क्या है टीबी रोग, जानिए इसके लक्षण और कारण

नई दिल्ली। 24 मार्च का दिन विश्व में टीबी या तपेदिक दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि आज ही के दिन साल 1882 में जर्मन के फिजिशियन और माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कॉच ने टीबी के जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस की खोज की थी। इसके बाद से लोगों को इस खतरनाक बीमारी से छुटकारा मिलने लगा था। टीबी रोग काफी खतरनाक और संक्रामक बीमारी होती है, जो ट्यूबरक्‍युलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है।

इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों से लेकर ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गले आदि में भी पड़ता है। यह बीमारी ज्यादातर ऐसे लोगों को होती है जिनके शरीर में पौषण में कमी होती है खान पान सही नही होने के कारण यह बीमारी कमजोर लोगों पर सीधे अटैक करती है। यह रोग हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में असानी से फैल जाता है। इसका यदि सही समय पर सही इलाज ना किया जाए तो यह जानलेवा होजाती है।

क्षय रोग होने के कारण-

क्या आप जानते कि इस बीमारी के होने की सबसे बड़ी वजह हम खुद होते है क्योंकि सही समय पर खान पान ना होने के चलते, या फिर बाहर का खुला खाना खाकर, घर पर रखा बासा भोजन करने से टीबी रोग होने के खतरे बढ़ जाते है। टीबी जीवाणु के कारण होती है इस जीवाणु को माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसि नाम से जाना जाता है। यदि कोई व्यक्ति इस जीवाणु के संपर्क में आता है और जीवाणु से ग्रसित व्यक्ति के पास कोई दूसरा व्यक्ति बैठ जाता है तो ग्रसित व्यक्ति के मुँह से निकले छींटे दूसरे व्यक्ति के पास तेजी से पंहुच जाते है जिससे वो व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता हैं।

यदि इस रोग के लक्षणों को सही समय पर पहचान लिया जाए तो सही इलाज करने से इस बीमारी को खत्म किया जा सकता है।

आइये जानते है टीबी के लक्षणों के बारे मे...

क्षय रोग (टीबी) के लक्षण-

1. तीन हफ़्तों से ज्यादा समय तक लगातार खांसी का बने रहना।

2. खांसी के साथ साथ बुखार का आना और ठण्ड लगना ।

3. सीने में दर्द होना और खांसते वक्त दर्द का बढ़ जाना।

4. इस रोग के होने से कमजोरी और थकाबट का आना।

5. भूख न लगना तथा वजन का कम होना।

6. रात में सोते समय बैचेनी होने के साथ अधिक पसीना आना।

उपचार तथा देखभाल-

क्षय रोग (टीबी) संक्रमित रोग होता है जिसके कारण यह शरीर के अन्य हिस्से जैसे की हड्डियां, मष्तिष्क, पेट, लीवर, किडनी पर तेजी से असर कर सकता है। इस रोग का इलाज डॉक्टर तथा डाइइटीएन की सलाह के साथ महिनों तक चलता है।

टीबी के इलाज के दौरान मरीज को कई प्रकार की एंटीबायोटिक दवाईयां दी जाती है जो शरीर के अंदर मौजूद माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसि जीवाणु को नष्ट करने में मदद करती है। लेकिन इलाज के दौरान मरीज कुपोषित होने लगता है जिससे शरीर कमजोर होने के साथ वजन कम होने लगता है, खून की कमी जैसी अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती है।

टीबी के मरीजों के लिए सही आहार एवं का पोषण :

टीबी के साथ कुपोषण की कमी को दूर करने के लिए मरीजों को टीबी की एंटीबायोटिक दवाइयों के साथ साथ मल्टीविटामिन्स, मल्टीमिनरल्स तथा उचित मात्रा में एनर्जी, प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट्स, तथा भोजन में फाइबर की सही मात्रा लेना जरुरी है जो की इस प्रकार हैं।

प्रोटीन: शरीर की हड्डियां मजबूत बनी रहे इसके लिए प्रोटीन की मात्रा 1.2 से लेकर 1.5 ग्राम रोज लेना चाहिए। प्रोटीन तथा ऊर्जा की उचित मात्रा के साथ विटामिन्स और मिनरल्स जैसे की विटामिन डी, विटामिन इ, विटामिन सी, विटामिन ए, बी काम्प्लेक्स विटामिन, के साथ कैल्शियम उचित मात्रा में लेना चाहिए।

इसके अलावा टीबी के मरीज को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। रोज संतुलित आहार लेना चाहिए। सन्तुलिन आहार में आपकी थाली में सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे दालें, दूध, दही, घी, पनीर, हरी सब्जियां खाने में सम्मलित करें। इस प्रकार के आहार लेने से हम टीबी से होने वाली मृत्यु दर को रोक सकते है और इस बीमारी से अपने आप का बचाव भी कर सकते है।



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